'कोरोना का डर'
डर बहुत है आजकल
पीड़ा नही, पर पीड़ा है
स्कूल फीस न दे पाने की
नौकरी छूट जाने की
अपनों से न मिल पाने की
किराया न दे पाने की॥
पर इस डर में भी हमको
हिम्मत बढ़ानी होगी
कभी एक दूसरे की तो
कभी खुद की पीठ थपथपाने होगी॥
क्योंकि ये जीवन है
चलते रहना इसका काम
कोई साथी छूट भी जाए
तो यादें करेंगी उसका काम॥
एक दिन वह भी आएगा
जब हर जीवन मुस्कुराएगा
उस 'वर्तमान' में होगी खुशहाली
'कोरोना' इतिहास बन जाएगा॥
"भावना भंडारी"
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